🌺ध्यान की परम अवस्था है आनंद: आनंद ही परमात्मा हैं🌺
🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷
“”सतगुरु जी की कृपा से प्रकट होता है आंतरिक आनंद””“
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
“गुरु कृपा बिन ज्ञान नहीं, गुरु कृपा बिन ध्यान।
सतगुरु ही परमेश्वर, इनके चरण प्रमाण॥”
🙇♀️🙇♀️🙇♀️🙇♀️🙇♀️🙇♀️
🌸ध्यान वह पवित्र साधना है जो हमें बाहरी जगत की अस्थायी खुशियों से ऊपर उठाकर, अपने आत्म स्वरूप की सच्ची पहचान कराती है। संसार की वस्तुएँ क्षणिक सुख देती हैं — कुछ पल की उत्तेजना, कुछ पल की प्रसन्नता — परंतु वह शांति नहीं जो आत्मा खोजती है।
🌸🌾ध्यान में डूबते ही मन का शोर मिटता है, और भीतर एक मधुर निस्तब्धता प्रकट होती है। यही निस्तब्धता ही परम शांति और परम आनंद का स्वरूप है।
*🌹यह आनंद किसी बाहरी वस्तु से नहीं, बल्कि हमारे भीतर बसे परमात्मा से आता है — और उस तक पहुँचने का मार्ग केवल श्री परमहम्स सतगुरु जी की कृपा और भक्ति से ही खुलता है।🧘🏻🧘🏻🧘🏻🧘🏻
🙏🏻🙏🏻श्री परमहंस सतगुरु जी हमारे अंतःकरण के अंधकार को दूर कर, आत्मा के भीतर छिपे दिव्य प्रकाश को प्रकट करते हैं।🙇♀️🙇♀️
🌸जब हम पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और समर्पण से उनके नाम का ध्यान करता है, तब मन स्थिर होता है और आत्मा को अपने स्रोत — परमात्मा — की झलक मिलती है।
🌸संसार के सुख में उत्तेजना है, पर ध्यान के आनंद में अमृत जैसी शांति है।
🌹संसार हमें बाहर की ओर खींचता है, जबकि श्री परमहम्स सतगुरु जी की कृपा हमें भीतर की ओर ले जाती है — जहाँ न कोई भय है, न कोई चाह, केवल प्रेम, प्रकाश और शांति का अनंत सागर है।
File:205[Uttejana Ka Tyag]
Time :30:34
🌸🌸
🌹🌹श्री परमहंस सतगुरु जी की भक्ति ही वह पुल है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ देती है।
उनकी कृपा से ही साधक का मन स्थिर होता है, और उसी स्थिरता में प्रकट होता है वह दिव्य आनंद — जो नष्ट नहीं होता, जो अमर है, और जो स्वयं परमात्मा का रूप है।🌹🌹
🙏🏻 श्री परमहंससतगुरु जी की शरण में रहना ही सच्ची साधना है,
क्योंकि उन्हीं की कृपा से आत्मा को मिलता है — परम आनंद और परमात्मा का साक्षात्कार। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
बोलो जयकारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज की जय🙇♀️🙇♀️🙇♀️🙇♀️