“गुरु कृपा का मार्ग -विनम्रता और प्रेमपूर्ण व्यवहार”🙇♀️🙇♀️🌹🙏🏻
“🌸🌹एक गुरमुख के जीवन में यह अत्यंत आवश्यक है कि उसका व्यवहार सदैव सकारात्मक, प्रेमपूर्ण और विनम्र हो। हमारे शब्द, हमारे विचार और हमारे कर्म—कहीं भी किसी का मन न दुखाएँ, क्योंकि प्रत्येक हृदय में वही परमात्मा निवास करता है। जब हम दूसरों को पीड़ा देते हैं, अनजाने में ही गुरु मर्यादा से दूर चले जाते हैं।
🌸🌹गुरु महाराज जी की सच्ची प्रसन्नता केवल बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि हमारे शुद्ध आचरण और निर्मल भावनाओं से प्राप्त होती है। इसलिए हर पल उनका शुकराना करते हुए अपने व्यवहार के प्रति सजग रहना ही एक गुरमुख की पहचान है।
File:164(Positive Behaviour)
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🌸🌹जब हमारा हृदय कृतज्ञता से भरा हो, दृष्टि करुणा से युक्त हो और व्यवहार प्रेम से ओतप्रोत हो—तभी हमारा जीवन गुरु कृपा का जीवंत उदाहरण बनता है। आइए, हम सब मिलकर ऐसा जीवन जिएँ जहाँ हमारे कारण किसी का भी दिन दुख से न भरे, बल्कि हमारे व्यवहार से दूसरों को शांति, स्नेह और सकारात्मकता की अनुभूति हो,
तब ही हम एक सच्चे गुरुमुख कहलाएंगे।🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🙇♀️
बोलो जयकारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज की जय 🙇♀️🙇♀️🙇♀️🙇♀️🙏🏻🌹