🕉️ ॐ श्री परमहंसाय नमः
इस एक महामंत्र में ही दीपावली का सच्चा सार छिपा है —
क्योंकि जब साधक इस मंत्र का जाप करता है, तो उसके भीतर का अंधकार मिटने लगता है, और परम ज्योति का दीपक स्वयं प्रज्वलित हो उठता है। 🌟
🌼 बाहरी दीयों से परे – भीतरी दीपों की दीपावली
हर वर्ष हम अपने घरों को रोशनी से भर देते हैं —
लेकिन इस वर्ष एक क्षण रुकिए, और सोचिए —
क्या हमने अपने मन के भीतर का अंधेरा मिटाया है?
क्या हम अपने भीतर बैठे उस “परम दीप” को जलाने की दिशा में बढ़े हैं?
जब हम ॐ श्री परमहंसाय नमः का उच्चारण करते हैं,
तो यह मंत्र हमारे चक्रों में सोई ऊर्जा को जगाता है,
आत्मा के भीतर जमी धूल को हटाता है,
और उस अनंत ज्योति से जोड़ देता है,
जो हमारे सद्गुरु के स्वरूप में प्रकाशित है।
🌺 भक्ति की रोशनी – सच्ची दीपावली
दीपावली का अर्थ सिर्फ दीप जलाना नहीं,
बल्कि अपने भीतर नाम का दीप जलाना है।
जब मन प्रेम और श्रद्धा से “ॐ श्री परमहंसाय नमः” गुनगुनाता है,
तो हृदय में एक ऐसा प्रकाश फैलता है,
जो न तेल से बुझता है, न समय से।
वह प्रकाश — गुरु कृपा का, प्रेम का, और आत्म-चेतना का होता है।
✨ गुरु ही सच्ची लक्ष्मी हैं
जिस जीवन में गुरु का प्रकाश है,
वहाँ लक्ष्मी स्वयं टिक जाती है —
क्योंकि जहाँ ज्ञान है, वहाँ समृद्धि है।
जहाँ करुणा है, वहाँ आनंद है।
जहाँ नाम है, वहाँ परम शांति है।
🌼 एक दिव्य संकल्प इस दीपावली पर
“हे प्रभु, जैसे मैंने अपने घर को दीपों से सजाया है,
वैसे ही मेरे अंतर्मन को भी अपने प्रेम, करुणा और ज्ञान के प्रकाश से आलोकित कर दो।
मेरा अहंकार, मेरा भय, मेरा मोह — सब तुम्हारे चरणों में विलीन हो जाए।”
🌸 याद रखिए…
दीपावली का सच्चा अर्थ यही है —
दीपक बाहर जलाओ, पर साथ ही भीतर भी एक दीप जलाओ —
जो ॐ श्री परमहंसाय नमः की लौ से प्रज्वलित हो।
🕯️
“अपो दीपो भव — स्वयं अपना दीप बनो।”
जब आत्मा का दीप जलता है,
तो परमात्मा स्वयं उसमें निवास करते हैं।
जय सच्चिदानंद जी 🙏🌺