नेपाल, विशेष रूप से काठमांडू घाटी, अपनी गहरी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इन परंपराओं में सबसे अधिक मनमोहक और रहस्यमय है कुमारी पूजा की प्रथा, जहाँ एक छोटी लड़की को साक्षात देवी का रूप मानकर पूजा जाता है। यह कन्या, जिसे कुमारी माता या जीवित देवी कहा जाता है, हिंदू और बौद्ध धर्म की परंपराओं का एक अनूठा संगम है।
1. कुमारी कौन है?
कुमारी, ‘कुँवारी कन्या’ (unmarried virgin girl) शब्द से लिया गया है। यह नेपाल में शक्ति (देवी दुर्गा) का एक भौतिक अवतार मानी जाती है। इन्हें विशेष रूप से तलेजू भवानी (शाही संरक्षक देवी) का मानवीय रूप माना जाता है।
2. चयन प्रक्रिया (The Selection Process)
कुमारी का चयन अत्यंत कठिन और गूढ़ प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। यह लड़की न्यूवारी (Newari) शाक्य जाति (गहने बनाने वाले) से होनी चाहिए और कई कठोर दैवीय गुणों को पूरा करना चाहिए, जिनमें शामिल हैं:
शारीरिक शुद्धता: उसका शरीर बिल्कुल निर्दोष होना चाहिए (कोई दाग, खरोंच या बीमारी नहीं)।
32 शुभ लक्षण: उसके अंदर 32 पारंपरिक लक्षण होने चाहिए, जैसे कि काली आँखें, बरगद के पेड़ जैसी जांघें, छोटी जीभ, और सुनहरी आवाज़।
साहस की परीक्षा: उसे एक अँधेरे कमरे में भयानक अनुष्ठानों (जैसे भैंसों के कटे हुए सिरों के बीच) के सामने बैठाया जाता है, और जो कन्या बिना डरे शांत रहती है, उसे देवी के रूप में चुना जाता है।

Kumari Ghar (house of Goddess Kumari)
3. कुमारी का जीवन और पूजा
कुमारी का जीवन सामान्य नहीं होता। चयन के बाद, वह अपने परिवार से दूर, कुमारी घर (Kumari Ghar) नामक शाही निवास में रहती है।
दैवीय दर्जा: लोग उसे देवी के रूप में पूजते हैं। वह सार्वजनिक समारोहों, विशेषकर इंद्र जात्रा त्योहार के दौरान, पालकी (रथ) में दर्शन देती है।
शासकों का सम्मान: ऐतिहासिक रूप से, नेपाल के राजा और आज भी देश के उच्च अधिकारी उनसे आशीर्वाद लेने जाते हैं। यह माना जाता है कि कुमारी का आशीर्वाद राजा के शासन को वैधता और शक्ति प्रदान करता है।
अलौकिक संकेत: कुमारी के भाव और क्रियाओं को भविष्य के संकेतों के रूप में देखा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि वह रोती है या हँसती है, तो उसे अशुभ माना जाता है।
4. देवीत्व का अंत (Retirement from Divinity)
कुमारी का कार्यकाल तब समाप्त हो जाता है जब वह पहली बार मासिक धर्म शुरू होने पर, या जब वह किसी गंभीर चोट या रक्तस्राव का अनुभव करती है। यह घटना देवी की शक्ति को उसके शरीर से बाहर निकलने का संकेत देती है।
निवृत्ति के बाद: सेवा समाप्त होने पर, वह सामान्य जीवन में लौट आती है। हालाँकि, सेवानिवृत्त कुमारियों के लिए सामाजिक जीवन और विवाह में कठिनाइयाँ अक्सर देखी जाती हैं, क्योंकि यह लोक कथा प्रचलित है कि कुमारी से विवाह करने वाले पुरुष पर दुर्भाग्य आता है। हालाँकि, आधुनिक समय में ये रूढ़ियाँ टूट रही हैं।
5. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
कुमारी परंपरा हिंदू धर्म की शक्तिवाद (Shaktism) और बौद्ध धर्म के वज्रयान (विशेषकर न्यूवारी बौद्धों) दोनों में गहराई से समाई हुई है।
यह स्त्री शक्ति और मातृत्व के सम्मान का प्रतीक है।
यह परंपरा काठमांडू घाटी की अद्वितीय संस्कृति का सबसे जीवंत प्रमाण है, जो धर्मों और समुदायों के बीच एक सेतु का काम करती है।