🌸 सतगुरु की कृपा से खुलता है उल्टा कुआँ 🌸
संत पल्टू दास जी अपनी वाणी में कहते हैं—
“उल्टा कुआँ गगन में, तिसमें जले चिराग।
पल्टू यहै विचित्र है, बूझै सतगुरु भाग॥”
💫⭐गुरुमुखों यह कुआँ धरती पर नहीं, बल्कि हमारे भीतर गगन मंडल में है।
🌼🌸साधारण कुएँ से केवल जल मिलता है, जो तन की प्यास बुझाता है!
🌼🌸लेकिन यह उल्टा कुआँ हम को ऊपर खींचकर आत्मा का अमृत और परम ज्योति प्रदान करता है।
उस कुएँ में एक चिराग सदा प्रज्वलित रहता है।
यह कोई बाहरी दीपक नहीं, बल्कि आत्मा का शाश्वत प्रकाश है—जो अनंत काल से जल रहा है।
पर यह चिराग साधारण दृष्टि से दिखाई नहीं देता।
यह तो तभी दिखता है जब साधक सतगुरु की शरण में आकर उनका दिया हुआ नाम श्रद्धा और विश्वास के साथ जपता है।
🌼 सतगुरु की कृपा का महत्व 🌼
“श्री सतगुरु देव भगवान जी ही वह शक्ति हैं जो अंधेरे में पड़े शिष्य को भीतर का मार्ग दिखाते हैं”।🙏🏻🌹🙇♀️🙇♀️🙇♀️
गुरु महाराज जी की कृपा से मन की चंचलता शांत होती है और साधक की दृष्टि भीतर के गगन की ओर मुड़ती है।🙏🏻🌹
“सतगुरु जी ही उस उल्टे कुएँ का द्वार खोलते हैं और आत्मा के भीतर जलते हुए प्रकाश के चिराग का दर्शन कराते हैं”।
बिना सतगुरु के यह मार्ग अंधकारमय है, और उनकी कृपा से ही यह दिव्य रहस्य सहज हो जाता है।🙏🏻🌹🙏🏻🌹
🌸 नाम-जप और समर्पण का महत्व 🌸
🙏🏻🌹संतों ने बार-बार कहा है कि सतगुरु के दिए हुए नाम का जप ही वह चाबी है जो भीतर के दरवाज़े खोलती है।🙏🏻🌹
🙏🏻🌹जब हम नाम को श्रद्धा, प्रेम और विश्वास के साथ जपते है, तब भीतर की परतें हटती जाती हैं और गगन में जले चिराग का अनुभव होता है।🙏🏻🌹
पूर्ण समर्पण ही साधक को गुरु की अनुकंपा के योग्य बनाता है।
जो अपने अहंकार, संदेह और आलस्य को छोड़कर पूरी तरह सतगुरु पर निछावर हो जाता है,
उस पर कृपा की वर्षा होती है और उसका जीवन अंधकार से निकलकर प्रकाशमय हो जाता है।
💫⭐ संसार का कुआँ हमें नीचे गिराता है,
लेकिन गुरु का दिखाया उल्टा कुआँ हमें ऊपर, परमात्मा की ओर ले जाता है।
💫⭐संसार का दीपक थोड़ी देर में बुझ जाता है,
पर गगन में जला यह चिराग गुरु की कृपा से सदा प्रज्वलित दिखाई देता है।🙏🏻🌹
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🌼 प्रार्थना 🌼
हे सतगुरु देव,
हमें अपने चरणों में पूर्ण समर्पण का भाव प्रदान करो।
आपके दिए हुए पवित्र नाम का जप हम सदा श्रद्धा और विश्वास से करें।
आपकी कृपा की छाँव में हमारा जीवन निखरे और भीतर का चिराग हमें सदैव मार्ग दिखाता रहे।
आपकी अनुकंपा से हम उस उल्टे कुएँ का अमृत पान करें और परम ज्योति से एकाकार हो जाएँ।
- यही संत पल्टू दास जी की वाणी का सार है कि—
“उल्टा कुआँ गगन में है, उसमें चिराग जलता है, और उसका अनुभव केवल सतगुरु की कृपा और नाम-जप से ही संभव है“
। बोलो जयकारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज की जय🙇♀️🙏🏻🙇♀️🙏🏻🌹🌹