भक्ति का रास्ता फूलों भरा भी है 🌸 और काँटों भरा भी 🌵। यह रास्ता तभी खुलता है जब भक्त की चाह सिर्फ़ और सिर्फ़ भगवान हों 🙏। संसार के सुख, धन, पद, सिद्धियाँ – ये सब भक्ति के रास्ते पर मिलने वाले इम्तिहान हैं। असली भक्त वही है जो इन सबसे विचलित न होकर कहे –
👉 “मुझे न कुछ और चाहिए, मुझे तो केवल प्रभु चाहिए।”
👶 माँ और बच्चे का दृष्टांत
एक नन्हा बच्चा रोता है।
माँ पहले उसे खिलौने 🎁 देती है। अगर बच्चा चुप हो गया – मतलब उसका रोना खिलौनों के लिए था।
अगर खिलौनों से भी बच्चा नहीं मानता, तो माँ दूसरों की गोद में भेज देती है।
लेकिन अगर बच्चा वहाँ भी रोता ही रहता है, तो माँ समझ जाती है – यह बच्चा मुझे ही चाहता है ❤️।
और तब माँ दौड़कर उसे अपनी गोद में ले लेती है।
🌏 भगवान की परीक्षा
ठीक वैसे ही भगवान भी अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं:
पहले वह माया के खिलौने (धन, सुख, पद) फेंकते हैं।
अगर भक्त संतुष्ट न हुआ, तो वे सिद्धियाँ और चमत्कार भेजते हैं।
परंतु जब भक्त यह सब ठुकरा कर रोता रहता है – “मुझे केवल प्रभु चाहिए” – तब भगवान स्वयं प्रकट होकर अपने भक्त को गले लगाते हैं ✨।
🔑 सच्ची लगन की पहचान
सच्ची लगन वही है जो संसार की चकाचौंध या चमत्कारों से भी नहीं बदलती।
👉 यह अडिग, अविचल और अटल रहती है।
👉 ऐसा भक्त ही अंततः भगवान का साक्षात्कार करता है।
🕉️ संत वचन
“साईं से लगन एक लागी, दूजी लाग न काई।
ज्यों की ज्यों धरती रहे, तारा गगन समाई।।”
भावार्थ:
जिसकी लगन केवल प्रभु से होती है, उसके लिए संसार का कोई आकर्षण मायने नहीं रखता। 🌺
🌟 मुख्य संदेश
भक्ति का असली रहस्य यह है –
💎 धन मिले या गरीबी
🌹 सिद्धियाँ मिले या असफलताएँ
🔮 चमत्कार दिखे या कठिनाइयाँ
एक सच्चा साधक हमेशा यही कहता है:
👉 “मुझे कुछ नहीं चाहिए, मुझे तो केवल मेरे भगवान चाहिए।”
कितनी बड़ी बड़ी बातों को कितनी आसानी से हम लोगों तक पहुंचाते हैं संजीव सर।मैं धन्यवाद देती हूं अपने आप को ,उस दिन को जब सबसे पहले आपका वीडियो देखा था,करीब 3 साल पहले,उस दिन से अब तक लगातार इसी में मन लगता है।आपके लिए बस
नमन ही नमन है गुरुजी।